ओल्ड टेस्टामेंटHIOV

भजन संहिता 112

1याह की स्तुति करो [1]! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा का भय मानता है, और उसकी आज्ञाओं से अति प्रसन्न रहता है!

2उसका वंश पृथ्वी पर पराक्रमी होगा; सीधे लोगों की सन्तान आशीष पाएगी।

3उसके घर में धन सम्पत्ति रहती है; और उसका धर्म सदा बना रहेगा।

4सीधे लोगों के लिये अन्धकार के बीच में ज्योति उदय होती है; वह अनुग्रहकारी, दयावन्त और धर्मी होता है।

5जो पुरुष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुक़द्दमें को जीतेगा।

6वह तो सदा तक अटल रहेगा; धर्मी का स्मरण सदा तक बना रहेगा।

7वह बुरे समाचार से नहीं डरता; उसका हृदय यहोवा पर भरोसा रखने से स्थिर रहता है।

8उसका हृदय सम्भला हुआ है, इसलिये वह न डरेगा, वरन् अपने शत्रुओं पर दृष्‍टि करके सन्तुष्‍ट होगा।

9उसने उदारता से दरिद्रों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा; ⓐ  और उसका सींग महिमा के साथ ऊँचा किया जाएगा।

10दुष्‍ट इसे देखकर कुढ़ेगा; वह दाँत पीस-पीसकर गल जाएगा; दुष्‍टों की लालसा पूरी न होगी [2]।