न्यू टेस्टामेंटHIOV
1फिर उसने अपने बारह चेलों को पास बुलाकर, उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया कि उन्हें निकालें और सब प्रकार की बीमारियों और सब प्रकार की दुर्बलताओं को दूर करें। ⓐ
2इन बारह प्रेरितों [1] के नाम ये हैं : पहला शमौन, जो पतरस कहलाता है, और उसका भाई अन्द्रियास; जब्दी का पुत्र याकूब, और उसका भाई यूहन्ना;
3फिलिप्पुस, और बरतुल्मै, थोमा, और महसूल लेनेवाला मत्ती, हलफई का पुत्र याकूब, और तद्दै,
4शमौन कनानी, और यहूदा इस्करियोती जिसने उसे पकड़वा भी दिया। ⓑ
5इन बारहों को यीशु ने यह आज्ञा देकर भेजा : “अन्यजातियों [2] की ओर न जाना, और सामरियों ⓒ के किसी नगर में प्रवेश न करना।
6परन्तु इस्राएल के घराने ही की खोई हुई भेड़ों के पास जाना। ⓓ
7और चलते-चलते यह प्रचार करो : ‘स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।’ ⓔ
8बीमारों को चंगा करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो। तुम ने सेंतमेंत [3] पाया है, सेंतमेंत दो।
9अपने पटुकों में न तो सोना, और न रूपा, और न ताँबा रखना;
10मार्ग के लिये न झोली रखो, न दो कुरते, न जूते और न लाठी लो, क्योंकि मजदूर को उसका भोजन मिलना चाहिए। ⓕ
11“जिस किसी नगर या गाँव में जाओ, तो पता लगाओ कि वहाँ कौन योग्य है। और जब तक वहाँ से न निकलो, उसी के यहाँ रहो।
12घर में प्रवेश करते हुए उसको आशीष देना। ⓖ
13यदि उस घर के लोग योग्य होंगे तो तुम्हारा कल्याण उन पर पहुँचेगा, परन्तु यदि वे योग्य न हों तो तुम्हारा कल्याण तुम्हारे पास लौट आएगा।
14जो कोई तुम्हें ग्रहण न करे और तुम्हारी बातें न सुने, उस घर या उस नगर से निकलते हुए अपने पाँवों की धूल झाड़ डालो। ⓗ
15मैं तुम से सच कहता हूँ कि न्याय के दिन ⓘ उस नगर की दशा से सदोम और अमोरा के देश ⓙ की दशा अधिक सहने योग्य होगी।
16“देखो, मैं तुम्हें भेड़ों के समान भेड़ियों के बीच में भेजता हूँ, ⓚ इसलिये साँपों के समान बुद्धिमान और कबूतरों के समान भोले बनो ⓛ ।
17परन्तु लोगों से सावधान रहो, क्योंकि वे तुम्हें महासभाओं ⓜ में सौंपेंगे, और अपनी पंचायतों में तुम्हें कोड़े मारेंगे। ⓝ
18तुम मेरे लिये हाकिमों और राजाओं के सामने उन पर, और अन्यजातियों पर गवाह होने के लिए पहुँचाए जाओगे। ⓞ
19जब वे तुम्हें पकड़वाएँगे तो यह चिन्ता न करना कि हम किस रीति से या क्या कहेंगे, क्योंकि जो कुछ तुम को कहना होगा, वह उसी घड़ी तुम्हें बता दिया जाएगा। ⓟ
20क्योंकि बोलनेवाले तुम नहीं हो, परन्तु तुम्हारे पिता का आत्मा ⓠ तुम में बोलता है।
21“भाई, भाई को और पिता पुत्र को, घात के लिए सौंपेंगे, और बच्चे माता-पिता के विरोध में उठकर उन्हें मरवा डालेंगे। ⓡ
22मेरे नाम के कारण सब लोग तुम से बैर करेंगे, पर जो अन्त तक धीरज धरे रहेगा उसी का उद्धार होगा। ⓢ
23जब वे तुम्हें एक नगर में सताएँ, तो दूसरे को भाग जाना। मैं तुमसे सच कहता हूँ, तुम इस्राएल के सब नगरों में न फिर चुकोगे कि मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।
24“चेला अपने गुरु से बड़ा नहीं होता; और न दास अपने स्वामी से। ⓣ
25चेले का गुरु के, और दास का स्वामी के बराबर होना ही बहुत है। जब उन्होंने घर के स्वामी को शैतान [4] कहा तो उसके घरवालों को क्या कुछ न कहेंगे! ⓤ
26“इसलिये मनुष्यों से मत डरना; क्योंकि कुछ ढँका नहीं जो खोला न जाएगा, और न कुछ छिपा है जो जाना न जाएगा। ⓥ
27जो मैं तुम से अन्धियारे में कहता हूँ, उसे तुम उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे छतों पर से प्रचार करो।
28जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उनसे मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नष्ट कर सकता है। ⓦ
29क्या पैसे में दो गौरैयें नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उनमें से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती।
30तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। ⓧ
31इसलिये डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। ⓨ
32“जो कोई मनुष्यों के सामने मुझे मान लेगा, उसे मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के सामने मान लूँगा।
33पर जो कोई मनुष्यों के सामने मेरा इन्कार करेगा, उस से मैं भी अपने स्वर्गीय पिता के सामने इन्कार करूँगा। ⓩ
34“यह न समझो कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ; मैं मिलाप कराने नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूँ।
35मैं तो आया हूँ कि : ‘मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी माँ से, और बहू को उसकी सास से अलग कर दूँ;
36मनुष्य के बैरी उसके घर ही के लोग होंगे।’ ⓐ
37“जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं; और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं; ⓑ
38और जो अपना क्रूस लेकर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं। ⓒ
39जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा। ⓓ
40“जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है। ⓔ
41जो भविष्यद्वक्ता को भविष्यद्वक्ता जानकर ग्रहण करे, वह भविष्यद्वक्ता का बदला पाएगा; और जो धर्मी को धर्मी जानकर ग्रहण करे, वह धर्मी का बदला पाएगा।
42जो कोई इन छोटों में से एक को मेरा चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूँ, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा।” ⓕ