ओल्ड टेस्टामेंटHIOV

इतिहास नामक पुस्तक – दूसरा भाग 4

1फिर उसने पीतल की एक वेदी बनाई, ⓐ  उसकी लम्बाई और चौड़ाई बीस बीस हाथ की और ऊँचाई दस हाथ की थी।

2फिर उसने ढला हुआ एक हौद बनवाया; जो एक किनारे से दूसरे किनारे तक दस हाथ तक चौड़ा था, उसका आकार गोल था, और उसकी ऊँचाई पाँच हाथ की थी, और उसके चारों ओर का घेर तीस हाथ के नाप का था।

3उसके नीचे, उसके चारों ओर, एक एक हाथ में दस दस बैलों की प्रतिमाएँ बनी थीं; जो हौद को घेरे थीं; जब वह ढाला गया, तब ये बैल भी दो पंक्‍तियों में ढाले गए।

4वह बारह बने हुए बैलों पर रखा गया, जिनमें से तीन उत्तर, तीन पश्‍चिम, तीन दक्षिण और तीन पूर्व की ओर मुँह किए हुए थे; और इनके ऊपर हौद रखा था, और उन सभों के पिछले अंग भीतरी भाग में पड़ते थे।

5हौद की धातु की मोटाई मुट्ठी भर की थी, और उसका किनारा कटोरे के किनारे के समान, सोसन के फूलों के काम से बना था, और उसमें तीन हज़ार बत [1] भरकर समाता था।

6फिर उसने धोने के लिये दस हौदी बनवाकर, पाँच दाहिनी और पाँच बाईं ओर रख दीं। उनमें होमबलि की वस्तुएँ धोई जाती थीं, परन्तु याजकों के धोने के लिये बड़ा हौद था। ⓑ

7फिर उसने सोने की दस दीवट विधि के अनुसार बनवाईं, और पाँच दाहिनी ओर और पाँच बाईं ओर मन्दिर में रखवा दीं। ⓒ

8फिर उसने दस मेज बनवाकर पाँच दाहिनी ओर और पाँच बाईं ओर मन्दिर में रखवा दीं। ⓓ  उसने सोने के एक सौ कटोरे बनवाए।

9फिर उसने याजकों के आँगन और बड़े आँगन को बनवाया, और इस आँगन में फाटक [2] बनवाकर उनके किवाड़ों पर पीतल मढ़वाया।

10उसने हौद को भवन की दाहिनी ओर अर्थात् पूर्व और दक्षिण के कोने की ओर रखवा दिया।

11हूराम ने हण्डों, फावड़ियों, और कटोरों को बनाया। इस प्रकार हूराम ने राजा सुलैमान के लिये परमेश्‍वर के भवन में जो काम करना था उसे पूरा किया :

12अर्थात् दो खम्भे और गोलों समेत वे कँगनियाँ जो खम्भों के सिरों पर थीं, और खम्भों के सिरों पर के गोलों को ढाँकने के लिए जालियों की दो दो पंक्‍ति;

13और दोनों जालियों के लिये चार सौ अनार और जो गोले खम्भों के सिरों पर थे, उनको ढाँकनेवाली एक एक जाली के लिये अनारों की दो दो पंक्‍ति बनाईं।

14फिर उसने कुर्सियाँ और कुर्सियों पर की हौदियाँ,

15और उनके नीचे के बारह बैल बनाए।

16फिर हूराम-अबी ने हण्डों, फावड़ियों, काँटों और इनके सब सामान को यहोवा के भवन के लिये राजा सुलैमान की आज्ञा से झलकाए हुए पीतल के बनवाए।

17राजा ने उनको यरदन की तराई में अर्थात् सुक्‍कोत और सारतान के बीच की चिकनी मिट्टीवाली भूमि में ढलवाया।

18सुलैमान ने ये सब पात्र बहुत मात्रा में बनवाए, यहाँ तक कि पीतल के तौल का हिसाब न था।

19अत: सुलैमान ने परमेश्‍वर के भवन के सब पात्र, सोने की वेदी, और वे मेज जिन पर भेंट की रोटी रखी जाती थीं,

20और दीपकों समेत चोखे सोने की दीवटें, जो विधि के अनुसार भीतरी कोठरी के सामने जला करती थीं;

21और सोने वरन् निरे सोने के फूल, दीपक और चिमटे;

22और चोखे सोने की कैंचियाँ, कटोरे, धूपदान और करछे बनवाए फिर भवन के द्वार और परमपवित्र स्थान के भीतरी दरवाजे और भवन अर्थात् मन्दिर के दरवाजे सोने के बने।